मुंबई के फ़ोर्ट में दो घंटे: फ़्लोरा फ़ाउंटेन से ओवल मैदान तक, शहर की इमारतों के दो अलग रूप

दक्षिण मुंबई की पुरानी इमारतें देखने के लिए पहले वास्तुकारों के नामों की लंबी सूची याद करना ज़रूरी नहीं है। फ़्लोरा फ़ाउंटेन (Flora Fountain) के पास से शुरू करें। पहले सड़कों से घिरे इस छोटे-से स्मारक को देखें, फिर ओवल मैदान (Oval Maidan) के उत्तरी हिस्से की ओर बढ़कर समझें कि दोनों तरफ़ की इमारतों का बीच की खुली जगह से कैसा रिश्ता है। फ़ोर्ट के इन दो नज़ारों का फ़र्क़ साफ़ होने लगेगा: एक जगह निगाहें चौराहे पर सिमटती हैं, दूसरी जगह खुले मैदान के साथ दूर तक फैलती हैं।

दो घंटे का यह छोटा कार्यक्रम उन लोगों के लिए है जो इमारतों को बाहर से ठहरकर देखना चाहते हैं। इसकी शुरुआत फ़ाउंटेन के पास चलने के लिए खुली सार्वजनिक पैदल पटरी से होती है और समापन ओवल मैदान के उत्तरी छोर के पास सार्वजनिक रूप से पहुँची जा सकने वाली जगह पर। इसमें होटल से आने और वापस जाने का समय शामिल नहीं है। कार्यक्रम में अदालत, विश्वविद्यालय या किसी आवासीय इमारत के भीतर जाना शामिल नहीं है, और मैदान की घास को पार करना भी ज़रूरी नहीं है। भारतीय मूर्तिकला और शिल्प देखने हों तो CSMVS संग्रहालय के लिए अलग समय रखें; उसे इन दो घंटों में समेटने की कोशिश न करें।

फ़्लोरा फ़ाउंटेन से शुरू करें: चौराहे के आकार और अनुपात को समझें

पहले नक्शे में “Flora Fountain / Hutatma Chowk” सहेज लें। पहुँचकर ऐसी पैदल पटरी पर मिलें जहाँ आने-जाने वालों का रास्ता न रुके; सड़क के बीच फ़ाउंटेन के चबूतरे को मिलने की जगह न मानें। MMR Heritage Conservation Society के पास सुरक्षित संरक्षण सर्वेक्षण में इसकी जगह वीर नरीमन रोड, महात्मा गांधी रोड और अन्य सड़कों के संगम पर दर्ज है। यह स्थिति अपने आप में देखने लायक है: फ़ाउंटेन पूरे सड़क-खंड को घेरने वाली इमारत नहीं, बल्कि कई दिशाओं से आने वाले शहरी नज़ारों को एक बिंदु पर जोड़ने वाली संरचना है।

इसे तीन स्तरों पर देखने के लिए 20 मिनट रखें। पहले देखें कि चौड़ा निचला हिस्सा ऊपर की ओर कैसे सँकरा होता जाता है। फिर हौज़ों के किनारों, उन्हें थामने वाले हिस्सों और मानव आकृतियों की मूर्तियों के बीच संबंध खोजें। अंत में अपनी पहले वाली जगह पर लौटकर देखें कि आसपास की इमारतें इसकी पृष्ठभूमि कैसे बनती हैं। एक-दो बारीकियाँ पहचान लेना काफ़ी है। हर तरफ़ से देखने के लिए जोखिम लेकर सड़क पार न करें। यह मानकर भी न चलें कि पानी चल रहा होगा, रात की रोशनी जली होगी या बाड़ के पास तक जा सकेंगे। पुराना सर्वेक्षण जगह और बनावट समझने में मदद करता है; वह आज के मौके पर लगे निर्देशों का विकल्प नहीं है।

वीर नरीमन रोड की ओर बढ़ें और खुली जगह पर ध्यान दें

अगले हिस्से में वीर नरीमन रोड की दिशा पकड़ते हुए ओवल मैदान के उत्तरी छोर की ओर रास्ता पहचानें। मुंबई के विश्व धरोहर नामांकन के सारांश में यह सड़क भवन-समूह की उत्तरी सीमा पर दिखाई गई है। इससे फ़ाउंटेन के आसपास का दृश्य और ओवल के उत्तर की इमारतों को देखने का क्रम आपस में जुड़ता है। चलने से पहले नक्शे में दोनों स्थानों का संबंध समझ लें, फिर मौके पर पैदल चलने वालों के लिए रास्ते वाले चौराहे चुनें।

रास्ता पहचानने, सामान्य गति से चलने और सड़क पार करने के लिए इंतज़ार करने को यहाँ 20 मिनट दिए गए हैं। यह रास्ता चलकर मापा गया समय नहीं है। इस लेख में ऐसे लगातार मार्ग की पुष्टि नहीं की गई है जो पूरी तरह सीढ़ियों और निर्माण की घेराबंदी से मुक्त हो; न ही किसी मेट्रो निकास को चुना गया है। घेराबंदी मिले या सड़क पार करने की जगह स्पष्ट न हो तो सुरक्षित पैदल पटरी पर रुककर फिर जाँचें। रास्ता पूरा करने के लिए वाहनों की सड़क पर न उतरें और समय-सारणी निभाने के लिए किसी संस्थान या आवासीय परिसर से होकर न निकलें।

ओवल के पास पहुँचते हुए देखें कि घने चौराहे की जगह सामने अधिक खुला दृश्य मिलने लगा है या नहीं। तुलना यह नहीं है कि “कौन-सी इमारत सबसे सुंदर है”, बल्कि यह है कि सड़क किनारे खड़े होने पर इमारत आपसे कितनी दूर है, उसका सामने का हिस्सा कितना दिखाई देता है और खुली जगह कई इमारतों को एक समूह की तरह कैसे सामने लाती है।

ओवल के उत्तर से इमारतों के दो रूप पढ़ें, हर पते तक पहुँचने की कोशिश न करें

इस भवन-समूह के बारे में UNESCO का विवरण बताता है कि ओवल मैदान के पूर्व में विक्टोरियन गोथिक और पश्चिम में आर्ट डेको इमारतें हैं। दोनों तरफ़ की इमारतें शहर के एक ही दौर के विस्तार का परिणाम नहीं हैं। यही बात बीच की खुली जगह को दक्षिण मुंबई में आए बदलाव समझने के लिए उपयोगी बनाती है।

20वीं सदी की शुरुआत में बैकबे में समुद्र पाटकर ज़मीन बनाने से मुंबई पश्चिम की ओर फैली। नए आवासों, व्यावसायिक इमारतों और सिनेमाघरों ने शहरी जीवन का एक और क्षेत्र बनाया। इसलिए ओवल के आर-पार दिखने वाला फ़र्क़ केवल सजावट बदलने का नहीं है; उसमें ज़मीन के इस्तेमाल और जीवन की ज़रूरतों में बदलाव भी शामिल है। भारतीय डिज़ाइन तत्वों के साथ घुली-मिली आर्ट डेको शैली को “इंडो-डेको” कहा गया।

पहले 25 मिनट पूर्व की ओर देखें। दृश्य साफ़ हो तो छतों की ऊँची-नीची रूपरेखा, मीनार जैसे हिस्से और बार-बार दोहराई गई खिड़कियों तथा अन्य खुली जगहों पर ध्यान दें। आकाश के सामने उभरती रूपरेखा पहचानने में राजाबाई घंटाघर एक संकेत हो सकता है, लेकिन उत्तरी हिस्से की हर जगह से उसका पूरा दिखाई देना तय नहीं है। UNESCO जलवायु के अनुकूल बनाए गए बालकनियों और बरामदों जैसे तत्वों का भी उल्लेख करता है। देखते समय केवल नुकीले शिखर गिनने के बजाय दीवारों से बाहर बनी छायादार जगहों पर भी ध्यान दें। आसपास की हर मेहराबदार खिड़की वाली इमारत को गोथिक न कहें।

फिर पश्चिम की ओर नज़र घुमाएँ और अगले 20 मिनट आवासीय इमारतों के सामने के हिस्सों का क्रम देखें। कौन-सी रेखाएँ आड़ी दिशा में फैलती हैं? किन जगहों पर बालकनियाँ, खिड़कियाँ और बाहर निकले हुए हिस्से बार-बार दिखाई देते हैं? दूर से हर खिड़की का काल तय करने की ज़रूरत नहीं है। देखें कि एक-जैसी दोहराती मंज़िलों वाली आवासीय इमारतें मैदान की ओर कैसे मुख करती हैं और उनकी रूपरेखा पूर्व की सार्वजनिक इमारतों से कैसे अलग है।

अवलोकन उसी खुली पैदल पटरी और वास्तव में दिखाई देने वाले हिस्सों तक सीमित रखें जहाँ आप खड़े हैं। पेड़ों, वाहनों या निर्माण के कारण कोई तरफ़ ढकी हो तो दिखाई देती छत या पड़ोसी इमारत का सामने का हिस्सा नोट करें। पूर्व-पश्चिम की तुलना पूरी करने के लिए पूरे ओवल का चक्कर न लगाएँ। इस लेख का दायरा उत्तरी छोर के पास की सार्वजनिक पहुँच वाली जगह है, पूरा विश्व धरोहर क्षेत्र घूमने का पैदल मार्ग नहीं।

कोर्ट व्यू आवासीय इमारत का पूरा सामने का हिस्सा और उसके आगे की सड़क
चित्र विवरण: कोर्ट व्यू इमारत के सामने के हिस्से की पुरानी तस्वीर, पूरे बाहरी रूप को देखने के संदर्भ के लिए। यह उच्च न्यायालय नहीं है; तस्वीर भीतर जाने की अनुमति नहीं दर्शाती और इस लेख में बताई गई उत्तरी जगहों से यही दृश्य मिलने की गारंटी भी नहीं देती। फ़ोटोग्राफ़र: DesiBoy101 / Court View, Oval Maidan, Mumbai / मूल तस्वीर / CC BY 4.0। इस पृष्ठ पर इस्तेमाल की गई तस्वीर को न काटा गया है, न उसमें संपादन किया गया है और न उसे दोबारा संपीड़ित किया गया है। पूरा चित्र अपने मूल अनुपात में दिखाया गया है; इससे निवासियों या प्रबंधन का समर्थन न समझें।

बीच में आराम करें, फिर तुलना पूरी करें

इमारतों को देखने के दोनों हिस्सों के बीच 20 मिनट का आराम रखें। पानी पिएँ या साथ लाया हल्का नाश्ता खाएँ। पास की किसी दुकान या खाने-पीने की जगह पर जाएँ तो पहले दाम और इंतज़ार देखें; बैठने की जगह न मिले तो योजना बदल दें। किसी एक कैफ़े तक पहुँचना अनिवार्य न बनाएँ। इंतज़ार लंबा हो तो आने-जाने का रास्ता रोके बिना थोड़ी देर पानी पीकर आराम कर लें, ताकि अंत के लिए समय बचे। यह पूरा भोजन करने का समय नहीं है; दोपहर का खाना अलग रखें।

आख़िरी 10 मिनट में तीन सवालों पर सोचें: फ़ाउंटेन के पास और ओवल के उत्तरी छोर में से कहाँ पूरे दृश्य को समझना आसान था? पूर्व और पश्चिम की रूपरेखाओं में सबसे स्पष्ट फ़र्क़ क्या था? कौन-सी बारीकियाँ आपने ख़ुद देखीं और कौन-सी केवल पढ़ी हुई पृष्ठभूमि से मालूम हैं? देखी हुई बातों को अनुमान से अलग रखना पाँच और इमारतों के नाम याद करने से अधिक उपयोगी होगा।

120 मिनट का बँटवारा

समयकार्यक्रम
09:00–09:05फ़ाउंटेन के पास सार्वजनिक पैदल पटरी पर मिलना और दिशा समझना
09:05–09:25फ़ाउंटेन की बनावट और चौराहे के आकार व अनुपात को देखना
09:25–09:45ओवल के उत्तर की ओर रास्ता पहचानना, चलना और सड़क पार करने के लिए इंतज़ार
09:45–10:10पूर्व की इमारतों की रूपरेखा और छाया देने वाले हिस्सों को देखना
10:10–10:30पानी और वैकल्पिक हल्के नाश्ते के लिए आराम; थोड़े इंतज़ार का समय भी शामिल
10:30–10:50पश्चिम की आवासीय इमारतों के सामने के हिस्सों की तुलना
10:50–11:00उत्तरी छोर की सार्वजनिक पहुँच वाली जगह पर अवलोकन समेटना और निकलने की दिशा जाँचना

तालिका का समय संपादकीय योजना है, मौके पर मापा हुआ समय नहीं। फ़ाउंटेन तक पहुँचने से पहले और अंतिम बिंदु से निकलने के बाद की यात्रा अलग गिनें। रास्ता पहचानने में 10 मिनट अतिरिक्त लगें तो पश्चिम की तरफ़ देखने का समय घटाकर 10 मिनट कर दें। और 10 मिनट लगें तो पूर्व की तरफ़ देखने के समय में से घटाएँ। आराम और अंत में निकलने की दिशा जाँचने का समय बनाए रखें। रास्ता बंद हो, बहुत गर्मी हो या बारिश के कारण बाहर ठहरना असुविधाजनक लगे तो जल्दी समाप्त कर दें; दो घंटे पूरे करना ज़रूरी नहीं है।

यात्रा, बजट और निकलने से पहले के चुनाव

उस दिन उपलब्ध रेल, मेट्रो या सड़क परिवहन के अनुसार फ़्लोरा फ़ाउंटेन के पास तक आने की योजना बनाएँ। फिर उतरने की जगह से सार्वजनिक पैदल पटरी तक का आख़िरी हिस्सा जाँचें। स्टेशन के नाम को अपने आप सत्यापित प्रवेश-बिंदु न मानें, और नक्शे की सीधी दूरी से सड़क पार करने का समय न निकालें। जिन लोगों को पूरे रास्ते सीढ़ियों से बचना हो या बच्चों की गाड़ी के लिए रास्ता चाहिए, उन्हें पहले वास्तविक निकास और सड़क की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। यह छोटा कार्यक्रम अभी पूरे मार्ग पर बाधारहित पहुँच की गारंटी नहीं देता।

इस योजना में टिकट लेकर किसी इमारत के भीतर जाना शामिल नहीं है। ख़र्च मुख्यतः आने-जाने और पानी व हल्के नाश्ते का है। उदाहरण के लिए, आप खाने-पीने के लिए 200 भारतीय रुपये की अपनी सीमा रख सकते हैं और उसमें वास्तविक यात्रा-ख़र्च अलग जोड़ सकते हैं। यह निजी बजट का उदाहरण है, किसी दुकान का बताया दाम नहीं, और इसमें पूरा भोजन मिलना भी तय नहीं है। संग्रहालय जाना, फ़िल्म देखना या बैठकर पूरा दोपहर का भोजन करना चाहें तो उसे अगला कार्यक्रम मानें और उसके लिए समय तथा पैसा अलग रखें।

दिन का ऐसा समय चुनना बेहतर है जब बाहर आराम से ठहरा जा सके। चलने के लिए उपयुक्त जूते पहनें और पानी साथ रखें। इस छोटे सफ़र का आनंद धीमे चलने में है: पहले देखें कि एक चौराहा निगाहों को कैसे समेटता है, फिर देखें कि एक खुला मैदान अलग-अलग दौर की इमारतों को शहर के एक ही दृश्य में कैसे साथ लाता है।